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धर्मशास्त्र का इतिहास भाग 3
धर्मशास्त्र का इतिहास भाग 3
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डॉ. पी.वी. काणे द्वारा लिखित 'धर्मशास्त्र का इतिहास भाग 3' हिंदू विधि एवं नैतिक परंपराओं के ऐतिहासिक विकास और दार्शनिक आधारों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करने वाला एक प्रामाणिक शोध ग्रंथ है। यह व्यापक पुस्तक धर्मशास्त्र ग्रंथों के विकास का क्रम निर्धारित करती है और विभिन्न कालों में उनकी व्याख्याओं, अनुप्रयोगों और सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करती है। भारतीय दर्शन, विधि और धार्मिक अध्ययन के छात्रों के लिए यह ग्रंथ अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह शास्त्रीय संस्कृत स्रोतों और भारतीय सभ्यता पर उनके चिरस्थायी प्रभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। पारंपरिक हिंदू न्यायशास्त्र की गहरी समझ प्राप्त करने के इच्छुक गंभीर विद्वानों और अभ्यासकर्ताओं के लिए यह एक प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ है।

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